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आठ दिवसीय उत्तरायणी मेले का रंगारंग समापन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन

आठ दिवसीय उत्तरायणी मेले का रंगारंग समापन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन

 

ब्यूरो बागेश्वर

बागेश्वर – ऐतिहासिक बाबा बागनाथ जी की पावन भूमि बागेश्वर में आयोजित उत्तरायणी कौतिक 2026 का आठ दिवसीय मेला भव्य एवं रंगारंग कार्यक्रमों के साथ संपन्न हो गया। समापन समारोह के अवसर पर पीएमजीएसवाई राज्य अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट, बागेश्वर विधायक पार्वती दास, बागेश्वर नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। समापन समारोह के दौरान स्थानीय कलाकारों ने नए–नए लोकगीतों की प्रस्तुति के साथ झोड़ा, चांचरी एवं छपेली जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान दर्शक भी गीत–संगीत की धुनों पर झूमते नजर आए। उत्तरायणी मेले के सफल आयोजन में योगदान देने वाले स्थानीय कलाकारों, खिलाड़ियों, स्कूली बच्चों एवं अन्य प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

पीएमजीएसवाई राज्य अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष शिव सिंह बिष्ट ने कहा कि उत्तरायणी कौतिक जैसे पारंपरिक आयोजन उत्तराखंड की लोक कला, लोक संगीत, लोक नृत्य और सांस्कृतिक चेतना को संरक्षित करने के साथ-साथ नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। उन्होंने नगर पालिका बागेश्वर द्वारा आयोजित इस भव्य मेले के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति के सदस्यों, अधिकारियों, कर्मचारियों, कार्यकर्ताओं, मीडिया बंधुओं एवं समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
बागेश्वर विधायक पार्वती दास ने कहा कि बागेश्वर की पहचान विश्व स्तर पर है। उत्तरायणी मेला ऐसा आयोजन है, जहां संस्कृति, व्यापार और राजनीति का संगम देखने को मिलता है। यह मेला हमारी लोक परंपराओं को जीवंत रखने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
वहीं नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने कहा कि उत्तरायणी मेला बागेश्वर की सांस्कृतिक धरोहर है। नगर पालिका का प्रयास रहा कि मेले को सुव्यवस्थित, सुरक्षित और आकर्षक बनाया जाए, जिससे स्थानीय कलाकारों को मंच मिले और आने वाले श्रद्धालु व पर्यटक बागेश्वर की संस्कृति से परिचित हो सकें। उन्होंने मेले को सफल बनाने में सहयोग देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। आठ दिवसीय उत्तरायणी कौतिक के समापन के साथ ही पूरे क्षेत्र में उत्साह और सांस्कृतिक गौरव का वातावरण देखने को मिला।

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